पहचान

पहचान

मेरी पहचान है क्या
मेरे दो शब्द
जो यहां आज
मैं सुना रहा।
मेरा रंग मेरे कपडे़
मेरा ढंग, फटे चिथडे़
इन सबसे
मेरी पहचान नही
गरीब हूं जरूर
मगर यह मेरी शान नही
मेरी पहचान केवल
तब तक ही है
जब तक मैं यहां
इस स्टेज पर
कुछ सुना रहा हूं
जाने के बाद
भला कौन किसे
पहचानता है
यह दुनिया ही रंगमंच है
यहां अपनी-अपनी भूमिका
निभा कर हर कलाकार को
बस चले जाना है।
-ः0ः-

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