छत की मुंडेर से

छत की मुंडेर से

छत की मुंडेर से
दूर-दूर तक तांकना,
खेतों की हरियाली को
आंखों से आंकना।
बसाकर हरियाली को
सीने रूपी गेह में
ओर नयन बन्द करके
अन्दर ही अन्दर झांकना,
छत की मुंडेर से
दूर-दूर तक तांकना।
खेतों की हरियाली को
आंखों से आंकना।
बस यदि जो मेरा चले
ना हरियाली को दूं उजड़ने
लहराती रहे हरियाली
करता हूं ये कामना,
छत की मुंडेर से
दूर-दूर तक तांकना,
खेतों की हरियाली को
आंखों से आंकना।
-ः0ः-

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