बसंत निराले

बसंत निराले

फूलों ने ली खोल पंखूरी
पवन देव हुए मतवाले,
ऐसे प्यारे मौसम में
आए सजधज बसन्त निराले।
सिर पर पीली पगड़ी बांधे
चादर हरे रंग की आंेढे
बैठ हाथी की पीठ पर आये
ले साथ में रंग वो सारे
ऐसे प्यारे मौसम में
आए सजधज बसन्त निराले।
वायु देव भी प्रचण्ड वेग में
कभी मिट्टी को छितराये
कभी दौड़ बगीचे की ओर
फूलों की सुगन्ध किरा ले
ऐसे प्यारे मौसम में
आए सजधज बसन्त निराले।
सांसे होती सुवाषित-सी
आंखों में भरती स्फूर्ति
छेड़ मन का राग ये भूमि
गीत गाती है रसवाले,
ऐसे प्यारे मौसम में
आए सजधज बसन्त निराले।
-ः0ः-

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