हवा

हवा

मंद होकर बह
तेज चलती ऐ हवा
आंचल में लपेट
इन पत्तों को
पेड़ से ना कर जुदा।
इठलाती यूं बल खाती
आती है कमर हिलाती
छुकर मुलायम पत्तों का बदन
धीरे से है मुस्कुराती
क्रती उनसे बैर सदा।
आंचल में लपेट
इन पत्तों को
पेड़ से ना कर जुदा।
मस्ती में झूमती है
आंचल में समेट पत्तों को
ईधर-ऊधर घुमती है
बेचारे मासूम नाजुक पत्तों से
सदा करती है किलोल हवा।
आंचल में लपेट
इन पत्तों को
पेड़ से ना कर जुदा।
-ः0ः-

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