“खून” डॉ. मोबीन ख़ान

अगर सच हर किसी को कुबूल होता मोबीन,
तो तेरे मुल्क का ऐसा हाल नहीं होता।।

मजहब के नाम पर कभी दंगा नहीं होता,
कोई कभी इस जमीन को खून से सींचा नहीं होता।।

अगर सच हर किसी को कुबूल होता मोबीन,
तो मोहब्बत के सिवा नफ़रत कोई फैलाया नहीं होता।।

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