“हक़ीक़त” डॉ. मोबीन ख़ान

ज़ोर आज़माइस बहुत हो चुकी,
अब हक़ीक़त क़ुबूल कर लो।।

कौन चिराग़ है और कौन आफ़ताब,
अन्धेरे को ये फ़ैसला करने दो।।

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 11/11/2015
  2. Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 19/11/2015

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