बेनाम याद

रेत की तरह तेरी यादों की लहरों से तर-बतर हो जाता हूँ,
जब-जब कोई सुनी सी आकृति, दिल में उमड़ती है |

किनारे की ख्वाहिश में, जब भी कोई शाम ढूंढता हूँ
ये चाँद भी तुझसे न्यौछावर लिए लगता है |

अधूरे ठौर सा आज भी हूँ, ना पूरा होने की ख्वाहिश, ना टूटने की ज़िद
एक बेनाम सी तस्वीर का चेहरा, शायद ये दिल आज भी पेहचानता है |
By Roshan Soni

2 Comments

  1. नवल पाल प्रभाकर नवल पाल प्रभाकर 10/11/2015
  2. roshan soni roshan soni 10/11/2015

Leave a Reply