मुक्तक

जिसके जो मुँह में आये वह बोल देता है |
भावनाओं का पिटारा – वह खोल देता है |
मानता हूँ, बोलने का अधिकार है सबको ,
एक क्षण में धरा आसमाँ को तोल देता है |
आदेश कुमार पंकज

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