ग़ज़ल

पास आकर क्यों बनाया ,
पागल मुझे है आपने |
अपनी मधुर मुस्कान से ,
घायल किया क्यों आपने |
अब तो सोते जगते मुझे ,
आप ही आप हैं दीखतें ,,
वर्षों पुरानी याद को है ,
ताज़ा किया क्यों आपने |
जब अँधेरो में रहने का ,
मैं आदी हो गया ,,
तब वहाँ नवदीप को है ‘
क्यों जलाया आपने |
मन के अंदर का समुन्दर ,
हो गया जब शान्त था |
फिर नया पंकज बबंडर ,
है क्यों उठाया आपने |
आदेश कुमार पंकज

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