ग़ज़ल

आज अपनों ने मुझे है ,वे – सहारा कर दिया |
आँसुओं ने आ जगत में, राज सारा कह दिया |
मानता तकलीफ में हो , पर उजागर न करो |
नश्तर लिये जो घूमते उन पर भरोसा न करो |
आदमी और आदमी की, परख करना सीख लो |
पंकज यहाँ खाई कुआँ उनसे निकलना सीख लो |
आदेश कुमार पंकज

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