ग़ज़ल

जिनके घरों को था रोशन किया |
उन्होंने ही मुझको, अँधेरा दिया |
जिनको मैंने सिखाया चलना यहाँ,
उन्होंने ही उलझन , से भर दिया |
नाव छोड़ी थी मैंने ,जिनके सहारे ,
उन्होंने ही पतवार , को रख दिया |
जिनको लगाया ,गले से था अपने ,
उन्होंने ही सर- कलम ,कर दिया |
पंकज बसाया था,जिनकों दिलों में ,
उन्होंने ही दर – बदर कर दिया |
आदेश कुमार पंकज

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