फुलों का जीवन

सुखे हुए फुलों का यहि होता अंजाम,
पैरों तले ही कुचले जाते है , सुबह हो या शाम।
जिस माटी से असने जन्म लिया और उसी में जाके समाए ,
ताकि फिर किसी नये बगिया में फिर से फ़ुल खिलाए।
देव चरणों में सजे या किसी के गले कि माला बन जाए,
तोड़ के उसको पौधों से अपनी कोई तो लेने आए।
लेखिका- सम्पा गांगुली

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/11/2015

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