|| माँ का प्यार ||

“मैला सा मेरा आँचल भी
देता है सुख सौम्य तुझे
थपकियाँ प्यार की गलों पे
ममता का मेरी एहसास कराती तुझे ,

याद रखना तू प्यार मेरा
वो गिरते हुए तुझे उठाना
लगा कलेजे से तुझको
फिर फिर प्यार की झप्पिया देना ,

वो बारिश में तेरा भीगके आना
सहज ही ममता का मेरी जागृत होना
पोछ शीघ्र तेरे बालों को फिर
आँचल से अपने ढक लेना,

वो तुतलाके तेरा बातें करना
और इशारे से मुझे बुलाना
वो भूख लगने पे तेरा रोना
और फिर तुझे स्तनपान कराना,

दर्द को सारे तेरे सहना
फिर भी मुस्कुराते ही रहना
तू भूल ना जाना इन बीते दिनों को
और याद मेरी ममता को रखना ,

जब असहाय कभी मै हो जाऊ
तो थोड़ी सी तुम दया करना
दे सहारा अपने कंधो का
मेरी थोड़ी सी मदद करना,

मेरे उन भावो को समझना
और कर्तव्यों के प्रति अपने तत्पर होना
करना याद बचपन के दिनों को
ना कभी मुझपे तुम गुस्सा होना ,

करना माफ़ गलतियों को मेरी
जैसे बचपन में मै करती थी
छोड़ सभी कार्यों को अपने
प्राथमिकता पहले तुझे देती थी ||”

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/11/2015

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