तुम्हारा खत

आज जाने क्यों मुझे
तुम्हारा ख्याल आया
बरसों पुराना तुम्हारा खत
आज मेरे हाथ आया
अंतहीन विशाल सागर में
हर किसी को मिलता नहीं मोती
तुम्हारा खत पढ़कर
वह मोती भी मैंने पा लिया
छुआ जो उसको मैंने
तुम्हारे हाथों का स्पर्श महसूस किया
खूशबू में उसकी
तुम्हारे प्रेम का एहसास हुआ
तुम्हारा लिखा एक-एक शब्द
मेरे बेजान हृदय में
तुम्हारे प्रेम का संचार कर
उसे पुनः जीवंत कर रहा है
तुम्हारी याद में गुजरे थे
जो पल तन्हा अकेले
वह वक्त आज खो गया है
बीता हुआ हर लम्हा
उसकी परछाईयां
जो जिन्दगी से दूर चली गई
तुम्हारे खत को पढ़कर
मेरे हृदय को छू कर निकली हैं
आज फिर से प्रेम का एहसास हुआ
तुम्हारे प्रेम की महक से
आज खिल उठे हैं
मेरे आंगन के मुरझाये फूल
सूरज की किरणों ने भी
आज मेरे घर पर दस्तक दी है
तन्हाई फैली थी जो
अंधेरा बनकर मेरे जीवन में
वह भी खत्म हुई है
बेदर्द दुनिया की रूसवाईयों से भी
अपना दामन छूटा है
तुम्हारे प्रेम की चांदनी
आज खिलकर मेरे घर आई है
इस खत के सहारे ही सही
आज फिर से
तुम्हारी याद मेरे पास आई है।

………………… कमल जोशी

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 07/11/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/11/2015

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