माटी से अनुपम प्यार है

माटी से अनुपम प्यार है

हमको अपने भारत की माटी से अनुपम प्यार है । माटी से अनुपम प्यार है माटी से अनुपम प्यार है । इस धरती पर जन्म लिया था , दशरथ नन्दन राम ने । इस धरती पर गीता गायी , यदुकुल भूषण श्याम ने । इस धरती के आगे झुकता , मस्तक बारम्बार है ।।ं।। इस धरती की गौरवगाथा , गायी राजस्थान ने । इसे पुनीत बनाया अपने वीरों के बलिदान ने । मीरा के गीतों की इसमें , छिपी हुई झंकार है ।।।। कण-कण मंदिर इस माटी का , कण कण में भगवान है । इस माटी से तिलक करो , यह अपना हिन्दुस्थान है । हर हिन्दू का रोम-रोम भारत का पहरेदार है ।।।।

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