दीप रे

दीप रे
जूझना है आंधियों से
बुझना नहीं है
ठगना है इन हवाओं को
दबना नहीं है
आस लिए जीना है
मिटना नहीं है
दीप रे
जलते ही रहना है
जलते ही रहना है

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/11/2015

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