संसार बदल दो

संसार बदल दो

तुम बढो, इतना बढो
कि…………………….
एक दिन संसार बदल दो ।
माना छाई है आज
पाष्चात्य की कालिमा
लेकर……………………..
जर्जर संस्कृति की मषाल
अंधकार को दूर कर दो,
तुम बढो, इतना बढो।
और भी…………………
बहुत सी हैं कुरीतियां
जो यहां पे हैं फैली
ज्ञान रूपी कुदाल उठाकर
इनकी जड़ें निकाल दो,
तुम बढो, इतना बढो।
नये युग की दहलीज पर
लेकर पुरानी संस्कृति साथ
ओर………………………
पुराने अच्छे विचार
आगे कदम बढ़ा दो,
तुम बढो, इतना बढो
कि…………………….
एक दिन संसार बदल दो ।
-ः0ः-

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/11/2015

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