लड़कियां

लड़कियां

नई नवेली दुल्हन-सी
अप्सराएं फिरती हैं बनी।
श्वेत लेप से पोत कपोल
करती गलियों में किलोल
चंचल चितवत सहमी-सी,
नई नवेली दुल्हन-सी
अप्सराएं फिरती हैं बनी।
सोलह कलाएं, सोलह श्रृंगार
सोलह वर्ष के हो गई पार
नरम-गरम शीतल-सी,
नई नवेली दुल्हन-सी
अप्सराएं फिरती हैं बनी।
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