लौ दिए की जगमगाती रहे

लौ दिए की जगमगाती रहे ,
उम्मीदों के स्वप्न सजाती रहे .

ये जो धवल , श्वेत है ,रुई की बाती,
कहीं सुदूर किसी किसान की पाती ,
काश उसके कर्जे उतरते रहे ,
उसकी बिटिया भी रंगोली सजाती रहे .

लौ दिए की जगमगाती रहे .

ये जो कीमती परिधान हम सब हैं पहने ,
कारीगरों ने बहाये थे खूब पसीने ,
कारखानों तक रौशनी आती रहे ,
धानी चुनर माथा सजाती रहे ,

लौ दिए की जगमगाती रहे .

ये जो मिट्टी के दिए कतार में रखे हैं ,
चाक पर की थी मेहनत,तब यूँ सजे हैं ,
कुम्हार ,मूर्तिकार भी दिवाली मनाते रहें ,
अन्नपूर्णा की रसोई भरमाती रहे ,

लौ दिए की जगमगाती रहे .

ये जो असली वैभव है , असली धन है ,
निरोगी काया और सरल, सुन्दर मन है ,
माँ लक्ष्मी कृपा बरसाती रहे ,
दुनिया आमोद मनातीं रहे .

लौ दिए की जगमगाती रहे .
उम्मीदों के स्वप्न सजाती रहे .

डॉ दीपिका शर्मा

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2015
  2. K K JOSHI Kamal Joshi 05/11/2015
  3. rakesh kumar rakesh kumar 06/11/2015
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/11/2015
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/11/2015
  6. Dr Deepika Sharma Dr Deepika Sharma 06/11/2015

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