गुमसुम ना बैठो

गुमसुम ना बैठो

गुमसुम यूं ना बैठिये
बोलिए कुछ तो बोलिये
आए हो जब से
इस दिल में
बहार छाई हैं
मन उपवन में,
मगर बैठो हो
ऐसे चुप क्यों ?
पंछियों की तरह चहकिये,
गुमसुम यू ंना बैठिये ।
विराने हुए गुलिस्तां
फकीर बने बादषाह
हाथ अपना दे दो हमें
हो जायें हम भी आबाद
मांग रहे हैं तुम से कुछ
अंजलि भरकर दीजिए,
गुमसुम यू ंना बैठिये ।
-ः0ः-

3 Comments

  1. omendra.shukla omendra.shukla 05/11/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2015
  3. SUHANATA SHIKAN SUHANATA SHIKAN 05/11/2015

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