चार चांद

चार चांद

आप मेरे घर आए
घर में चार चांद लगे।
मेरी मुरझाई हुई बगिया
फिर से खिल उठी
आप इतने दिनों से
न जाने कहां थे
हम दोनों ही जवां थे,
मगर मिलने अब लगे
आप मेरे घर आए
घर में चार चांद लगे।
मेरी आंख में
कोई सपना न था
भगवान की कसम
कोई दिल का अपना न था
गैरांे ने हमें संभाला नही
मगर अब संभलने लगे,
आप मेरे घर आए
घर में चार चांद लगे।
आप हमसे मिले
हम बहुत खुष हुए
पूछ कर तुम्हारा हाल
मन बिछ गया कदमों में
होठों पर हंसी छाने लगी
अश्रु अभिनन्दन करने लगे,
आप मेरे घर आए
घर में चार चांद लगे।
-ः0ः-

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2015

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