मेरी किस्मत

मेरी किस्मत

अरमानों के आईने में
पानी से पुते हुए रंग
बदसूरत-बेढंगी
आने वाली कल की मूर्त
चेहरे पर लहराता
ऊंची-नीची लहरों वाला
समुद्र का उथला किनारा
सबकुछ अपनी मुट्ठी में भर
मानों जैसे नाच रहा
कल-कल नदियां
विलीन हुई सब
हवा तार-बेतार हुई
उलझे तो उलझे किसमें
बाधाएं सारी दूर हुई
इठलाती बल खाती
सुमधुर शीतल चंचल हवा
शांत-षांत सी बहने लगी ।
उफान खाता समुद्र भी
लहरे ही लहरें दिखाने लगा
शांत-षांत सा रहने लगा।
दूर-दूर तक न जमीं हैं
न कहीं कोई जन्तु है
बस है तो चारों तरफ
पानी ही पानी भरा पड़ा है
रंगों के नाम पर नीला रंग
छितरा-छितरा कहीं गहरा है।
चारों तरफ की प्रकृति को
आगोष में भरकर अपने
पूरी तरह से ढक लिया है
दिखाई देता है तो बस
हर तरफ पानी-ही-पानी।

-ः0ः-

One Response

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2015

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