मेरा शौक नही

मेरा शौक नही

कागज पर कुछ लिखते रहना
भावों के सागर में बहना
अकेले यूं ही बैठे रहना
ये मेरा कोई शौक नही है।
गुमसुम सा यूं बैठ कर
अपनी मय में ऐंठ कर
बुझे-बुझे मन बैठे रहना।
ये मेरा कोई शौक नही है।
अगली -पिछली याद कर
भूली-बिसरी बातें कर
मन में आंसू बहाते रहना।
ये मेरा कोई शौक नही है।
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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/11/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2015

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