करता चला गया।

करता चला गया।

मन के भावों को
यूं ही बस
कागज के पन्नों पर
उकेरता चला गया
जीवन के हर पहलू को
सुखों ओर दुखों को
लेखनी की नोक से
मुलायम नाजुक से
कोमल पन्नों पर
खुरचता चला गया
हर दुख, हर कष्ट सहा
पर दुखों से डरकर मैंने
कभी किसी का बुरा न चाहा
जीवन का अभिन्न अंग जान
कोरे चिट्टे लचीले ता पर
पोतता चला गया ।

-ः0ः-

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/11/2015

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