एक बार निकल पड़।

एक बार निकल पड़।

आने वाली हर मुसीबत
खुद-ब-खुद हट जायेगी।
निकल पड़ घर से एक बार
मंजिल खुद आ जायेगी।
तलवार बन हवाएं भी
आयेंगी तुझे चीरने को
पर तु खुद चट्टान बन जा
सीना बज्जर का बना अपना
कोमल मृदू बन हवा
कदमों को तेरे चूम जायेगी।
आने वाली हर मुसीबत
खुद-ब-खुद हट जायेगी।
रोकेंगी रास्ता नदियां
पहाड़ बनेंगे अड़चन तेरी
पेड़ लगेंगे भयानक तुझे
डरावनी होगी रात अंधेरी
पर तु खुद दीपक बन जा
रात भी रोशन हो जायेगी।
आने वाली हर मुसीबत
खुद-ब-खुद हट जायेगी।
राहें लम्बी मत देख
राहों से तुझे क्या लेना है।
निगाहें टिका मंजिल पे अपनी
जिसको तुने पाना है।
कठिन कांटों भरी राहें भी
स्वागत करने को बिछ जायेंगी।
आने वाली हर मुसीबत
खुद-ब-खुद हट जायेगी।

-ः0ः-

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