मैं।

मैं।

मानता हूं कि
सांवला जरूर हूं
मगर मन का मैं
बिल्कुल शीषा हूं
बेदाग ओर स्वच्छ
तुरत का बना हुआ
साफ पानी से धुला
मेरा कोमल हृदय
आज भी तुझे ही
बस तुझे चाहता है
आजा अब बस
मैं बेताब हूं
मानता हूं मैं कि
सांवला जरूर हूं।
रंग पे जाना है तो
फिर जोखिम उठाना होगा
घुमना होगा हर जगह
न कोई ठिकाना होगा
रहता हो एक जगह
जहां तहां भटकना होगा
तब भी ऐसा ना मिलेगा
जैसा मैं वफादार हूं।
मानता हूं मैं कि
सांवला जरूर हूं।
-ः0ः-

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