डाल

डाल

लहराई,
सकुचाई,
थोड़ी-सी कमर हिलाई
फिर भी वह अपने आपको
उस शैतान नटखट से
बिल्कुल न बचा पाई।
उस नटखट ने उसे
इस कदर हिलाया।
टूट गया सारा बदन
सी….. मुंह से फूट पड़ा।
चेहरे की लालिमा को
ओर उसने बढ़ा दिया
फिर अचानक निकल गया
निढाल अकेली छोड़ वह ।
तन कंपित था मन तृप्त
फिर से थी वह प्यासी
फिर से जीने लगी वह
लेकर अपने अंदर उदासी,
देखो पेड़ की डाल थी वह
ओर हवा ने कुंभला दी।
-ः0ः-

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