हजारों कोशिशें ………गजल-1

हजारों कोशिशें कर ली उसे भुलाने की
पर मन उससे मिलने को तरसता भी है ।

कहने वाले इसे दिल का रोग कहते है मगर
इश्क में जीने से इश्क का रंग निखरता भी है ।

याद रहे इश्क हमेशा फायदे का सौदा नही
कई फ़ना होते हैं तो कुछ का आशियाँ सँवरता भी है ।

मैने भी खेल दिया है दाँव प्यार की बाजी मे
ये सोचकर कि जो दौड़ता है वही गिरता भी है ।

यूँ हवा में आबरू को मत उछलने देना कभी
इश्क काँधे का दुप्पटा है कभी सरकता भी है ।

कभी तंज न करना खुदा की रहमतो पर “राज”
वो कहीं धूप करता है तो कहीं बरसता भी है ।

राज कुमार गुप्ता – “राज“

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/11/2015
  2. Hiren 20/11/2015
  3. Patial 20/11/2015

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