जब तुम आओगी

शीर्षक – जब तुम आओगी

मेरी ज़िन्दगी में जब तुम आओगी ,
मेरे घर में , मेरे कमरे पर , मेरे दिल पर ,
मेरे ख्याबो पर अपना अधिकार जतलाओगी .
मेरे बिछावन पर पड़े सिलवटे ,
तुम्हारे होने का आभास दिलायेंगे .
तुम्हारे रेशमी जिस्म पर मैं जब इत्र छिर्कूंगा ,
तुम्हारे कमरबंद में जब अपनी उँगलियाँ घुमाऊंगा ,
तुम शरमाओगी ,इठलाओगी ,
मेरे करीब आओगी .
मेरी सुबह की नींद ,
तुम्हारे हाथों से बने चाय की ,
चुस्कियों से खुलेगी ,
मेरी शाम ,
तुम्हारे यौवन को निहारने में बीतेगी .
जब कभी मैं तुम से दूर जाऊँगा ,
तुम दरवाजे खोले मेरे इंतज़ार कर रही होगी .
बेचैन रहोगी , करवटे बदल रही होगी ,
जब मैं लौटूंगा ,
तुम आईने में ,
खुद को निहार रही होगी ,
मेरे पहुँचते ही ,
मेरे गले में अपनी बाँहो का हार डालोगी ,
मुझे देख मुकुराओगी , इठलाओगी .
मेरी ज़िन्दगी में जब तुम आओगी .——————————– — अभिषेक राजहंस

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/11/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/11/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/11/2015
  4. Sanjeev 05/11/2015

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