तुम देश प्रेमी कैसे

जिस घर में तुम रहते हो ,
उस घर ने मुझे भी तो सहारा दिया है .
जिस मंदिर की तुम घंटी बजाते हो ,
उसमे बैठा तुम्हारा भगवान ,
मुझ पर भी तो अपनी रहमत लुटाता है .
मेरे मस्जिद की नमाज का हक़ ,
मेरे अल्लाह तुम्हे भी तो देते हैं .
तो फिर तुम ,
मुझसे अलग कैसे .
तुम जिसे माँ मानते हो ,
उसका दूध मैंने भी तो पिया है ,
जिस मिटटी मैं तुम खेले ,
उसी में मैं भी तो लोटा हूँ.
तुम्हारी बेटी की शादी में,
सहनाई मैंने ही तो बजाई है .
तो फिर तुम ,
मुझसे अलग कैसे .
जिस झंडे को तुम तिरंगा मानते हो ,
उसके लिए मैंने भी तो जान लुटाई हैं.
तो फिर तुम ,
देश प्रेमी कैसे .
तुम्हे लगता हैं ,
तुम देशप्रेमी हो ,
पर ,
चुनने का हक़ तो मुझे मिला था ,
मुझे जाना था ,
या रहना था ,
जा सकता था में,
पर ,
अपनी मिटटी को कैसे भूलता ,
तुम्हे कौन अपना मानता ,
अपनी ईद की सेवई किसे खिलाता .
तुम्हारी दिवाली की मिठाई कौन खाता .
तो फिर तुम ,
मुझसे अलग कैसे .
और सिर्फ तुम ही ,
देशप्रेमी कैसे .

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/11/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/11/2015

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