हवा का झौंका

हवा का झौंका

आज हवा का झौंके ने
देखा मुझे तो इतना कहा
क्यों बैठे हो तुम गुमसुम से
बैठे हो तुम क्यों यहां।
आज की भागमभाग दौड़ में
निष्ंिचत तुम बैठे हो क्यों ?
जाकर करो तुम भी तैयारी
ऐसे अकेले बैठे हो क्यों
क्यों नही बनाकर साथी
दो किसी काम को अंजाम ।
क्यों बैठे हो तुम गुमसुम से
बैठे हो तुम क्यों यहां ।
माना भाग्य नही है साथ
मगर सलामत हैं दोनों हाथ
लगाओ मेहनत कुछ तुम
ओर देगा साथी साथ
रखना प्रभु पर भरोसा
छोड़ना न कभी तुम आष ।
क्यों बैठे हो तुम गुमसुम से
बैठे हो तुम क्यों यहां ।
प्रभु ने यदि साथ दिया तो
खुल जायेंगी ये बेड़ियां
ब्ंाधे हैं जिनसे हाथ तुम्हारे
कट जायेंगी ये हथकड़ियां
ठाली बैठकर फिर क्यों तुम
देखते हो ये जहां ।
क्यों बैठे हो तुम गुमसुम से
बैठे हो तुम क्यों यहां ।
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  1. निशान्त पन्त "निशु" निशान्त पन्त "निशु" 05/11/2015

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