गरीब पंक्तियां

गरीब पंक्तियां

मेरी कविता की
चंद पंक्तियां
फूलों की भांति
महकती हुई-सी
जीर्ण-षीर्ण कपड़े पहने
मुख पर चमक दमक लिये
सूरज की लाली-सी लाल
हरियाली-सी हरी-भरी
हर शब्द चंचल हो कर
तेरे होठों को छूने हेतु
घुमेंगे तेरे ईर्द-गिर्द
नाचेंगे-लहरायेंगे
फिर ये गीत ऐसे बनकर
दुनियां में छा जायेंगे
फुलेंगे-फलेंगे
तुमसे घुल-मिल जायेंगे
मेरे अधूरे गीत ये प्रिये।
-ः0ः-

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