“सिर्फ नाम की आज़ादी “

“आज़ादी का दिन है आज
झलक रही खुशी चेहरे पे सभी के
मन रहे स्वतंत्रता दिवस लोग
गाके गीत देशभक्ति के ,

अंग्रेजो से मुक्ति पाना
क्या यहीं है मतलब आज़ादी का
हो जेल में बंद देशभक्त और
स्वागत हो अत्याचारी का ,

बढ़ती हुयी बेरोजगारी और
पनपती हुयी अशिक्षा से
भूख से मरते लोगो का और
बढ़ती हुयी गरीबी से ,

साम्प्रदायिकता के दंगो से
होते लहूलुहानों का
आतंक की घटनाओं में
होते शिकार निर्दोष जनो का ,

सुरक्षा के आभाव में जीती
बलात्कार होती महिलाओं का
इंसाफ की उम्मीद लिए
होते जीवन के अन्तो का ,

बढ़ती हुयी अराजकता और
सदमे में जीते लोगो का
क्या इनसे आज़ादी मिल पायी है
या मुक्त इनसे कभी हो पाएंगे ,

होगा इनसे जिस दिन भारत मुक्त
उस दिन हम आज़ादी मनाएंगे
कर जयकारा भारत माँ का
फिर तिरंगा हम फहराएंगे ||”