“जमाना मोबाइल का “

“अजीब जमाना चल पड़ा है
आज यहाँ मोबाइल का
बिन इसके न एक पल को चैन
ना मिलता आराम है ,

मिलो दूर बसे मित्रो की
पल भर में यह खबर सुनाता
बाटता सुख दुःख लोगो का
और जन-जन तक सन्देश पहुँचाता,

वीडियो कालिंग,कॉन्फ्रेंस कालिंग,
तरह-तरह के फीचर्स है इसके
इंटरनेट की उपलब्धता से
होतें है सहज ही दर्शन सबके ,

बिन इसके लगता है जीवन शून्य
नीरस हो जाती है यह दुनिया
होती है खत्म जो बैटरी इसकी
अजीब सा तन्हापन छा जाता है ,

व्हाट्सप्प,फेसबुक फीचर्स इसके
मनोरंजन की बेला है
सोशल मीडिया में अफवाहों का
लगता यहाँ पे मेला है ,

सुविधाये मिलती इससे बहुत
पर तकलीफे भी यह देता है
बढ़ाता है अवसाद मन में
और जीवन तनाव ग्रस्त करता है ,

पनपते है अपराध भी इससे
क्षति जीवन को मिलती है
उपयोग सही ना होने से
तकलीफ ही इससे मिलती है ||”