शुभ कार्य का खाता खोलो

मानवता को ताक पे रख दो
बहती गंगा में मुँह धोलो ।
पीछे से तुम भोंक दो छुरा
लेकिन मुँह पर मीठा बोलो ।
ऐसी अपनी नियति दिखाओ
जिसमे खोट लगे ना कोई ।
चाहे दूजे की तुम गठरी
उससे सरे आम ही ले लो ।
भैया ये तो राम राज है
राजा सभी हुए अपराधी ।
जलदी करो कोई घोटाला
शुभ कार्य का खाता खोलो ।

राज कुमार गुप्ता – “राज“

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 03/11/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 03/11/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/11/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 03/11/2015

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