पैगाम

पैगाम

तुम्हारे आने का पैगाम
लेकर आई है हवा ।
लगने लगा है मुझे ऐसा
चारों ओर मुदित सा मन
कुछ महका कुछ बहका सा तन
ठंडी हिलोंरे सर्दी की
तन कंपित कर जाती हवा,
तुम्हारे आने का पैगाम
लेकर आई है हवा ।
हवा के साथ-साथ फूलों ने भी
प्रसन्न हो ली खोल पंखुरी
सुन्दर रूप निराला इसका
आंखों से मदिरा छलकाती हवा,
तुम्हारे आने का पैगाम
लेकर आई है हवा ।
-ः0ः-

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