फितरत ए इंसान नि कितना कुछ बदल डाला..

फितरत ए इंसान ने कितना कुछ बदल डाला
कभी मोहब्बत को आशिकी तो कभी
गम को इश्क का नाम बता डाला ।
यूँ तो अल्फाज़ नहीं कि बयाँ कर सकूँ मैं मोहब्बत
फिर भी दिल से निकला एक कलाम आज लिख डाला ।
किसी के दिल में मुस्कराहट ने घर किया तो किसी
को बातों ने मरीज ए इश्क बना डाला ।
चेहरे तो कही दिखे इस जिंदगी में
पर वो एक चेहरा जिसने जीने का तरीका बदल डाला ।
उड़ने लगा वो दिल आज बादलों की छावं में
चाँद पर जैसे आज एक बसेरा बना डाला ।
उस भोले से दिल ने
एक इंसान में पूरी दुनिया को बसा डाला ।
वक्त ने ली कुछ करवट ऐसी कि पूरी दुनिया मे उसे तन्हा बना डाला
न वक्त की थी कोई गल्ती न था उसका कोई कूसूर,
ये तो फितरत ए इन्सान ने सब कुछ कर डाला
एक के कुसूर ने ये क्या कर डाला !
मोहब्बत को दर्द ए वफ़ा का नाम दे डाला ।
फिर आज इस मोहब्बत ने एक और दिल कत्ले आम कर डाला
फितरत ए इंसान ने……………..
शुभम चमोला
Schamola50@gmail.com

5 Comments

  1. SUHANATA SHIKAN SUHANATA SHIKAN 02/11/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/11/2015
  3. Chamola Shubham Chamola Shubham 02/11/2015
  4. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 03/11/2015
  5. Chamola Shubham Chamola Shubham 03/11/2015

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