पहली बार

है आज भी याद वो दिन मुझको ,
जब पहली बार तुझे देखा |
गाल गुलाबी , चंचल चितवन ,
और अधरों की पतली रेखा ||

केसर मिली दूध सी रंगत ,
नव तरुणी की अल्हड़ काया |
कमर कमानी , नजरें तिरछी ,
मंद-मंद मुस्कान की माया ||

लाल दुपट्टा चुनर पीली ,
रहती हरदम छैल-छबीली |
ठहरे कदम पलट कर देखा ,
लेकिन कुछ मुँह से ना बोली ||

केश राशि थी निपट अमावस ,
धवल दंत थे सोम सरीखे |
सुर्ख हिना से सजी हथेली ,
कोई रूप सजाना तुमसे सीखे ||

बहुत पुरानी बात है ये ,
एक लम्बा अरसा बीत गया |
यादों के उन धागों से ,
मैं सपने बुनना सीख गया ;
मैं सपने बुनना सीख गया ||

9 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/10/2015
    • sushil sushil 30/10/2015
      • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/10/2015
    • sushil sushil 30/10/2015
  3. Shyam Shyam tiwari 30/10/2015
    • sushil sushil 30/10/2015
  4. Girija Girija 30/10/2015
    • sushil sushil 30/10/2015

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