खलबली

खलबली

अन्तर्मन में
मची खलबली
क्या करूं, क्या ना करूं,
अश्रुओं की
बहती नदियों में
बाढ़ अचानक बढ़ चली
तोड़ने लगी
पक्के किनारे
मन में
ऊथल-पुथल मची
बह गई सभी भावनाएं ।
कल की जो थी
नई तस्वीर
धीरे-धीरे
मिटने लगी,
तबाही मची
हर तरफ
बिखरा पड़ा
हर मेरा सामान
जान बचाने हेतु
भगदड़ चहूं ओर मची
हृदय पानी में
फुदक रहा
मस्तिष्क
मंत्रियों की भांति
निवारण इसका
ये सोच रहा
कैसे छुटे ?
पीछा मुसीबत से
बैठकर सभा में
बोल रहा
हर तरफ देख पानी
पानी निकालने की ष्
सोच रहा ।
-ः0ः-

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/10/2015

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