चंचल हवा।

चंचल हवा।

हवा भी कभी-कभी
खता खा ही जाती हैं।
जब तेरी जुल्फों को
उड़ाने के चक्कर में
खुद ही उलझ जाती है।
सिमट कर रह ही जाती है
तेरी उंगलियों के नीचे
ये बिदकी सी हवा
निरर्थक निकलने का प्रयास
प्रयास मात्र रह जाता
ईधर-ऊधर भटकती हवा
बचती-बचाती अपने आपको
इस कैद से छुड़ाकर
दूर ले जाती है खुदको
फिर भटकती-भटकती
किसी हंसीन की जुल्फों में
सुगन्ध लेने के लिए
फिर से उलझ जाती है।
-ः0ः-

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