कटी जुल्फें

कटी जुल्फें

हमने उन्हे
जुल्फें झटकने से
मना क्या किया
उन्होंने अपनी
जुल्फों को ही कटा लिया।
जुल्फों में बसे
हजारों जीवों को
घर से बेघर किया
उनका क्या बिगड़ा
जीवों का भोजन छिन गया।
जहां घुमते थे स्वतंत्र
वह घनेरा वन
उनके लिये छोटा पड़ गया।
भाई-बंधुओं से
उनका बिछोह हुआ।
सारे गमों का
आसमान मानों
उनके ऊपर ही टूट पड़ा
दुखी हो जीव
करने लगे हैं आत्म दाह
कोई झूल रहा है
गले में रस्सी डाल
कोई ईधर-ऊधर भटक रहा।
-ः0ः-

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/10/2015
  3. Girija Girija 01/11/2015

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