“फिर क्यूँ नहीं तुम मेरे हो ??”

“तुम ना थे कभी मेरे
शायद वह एक नियति थी
तू छोडके गयी मुझे
शायद वह एक नियति थी ,

दिल में बसती है तस्वीर मेरी
फिर क्यूँ नहीं तुम मेरे हो
होठो पे तुम्हारे मुस्कान है मेरी
फिर क्यूँ नहीं तुम मेरे हो ,

रहते हो हरदम तुम यादों में मेरे
आखों की मेरी बेचैनी हो तुम
करती हूँ प्यार बेइन्तहां तुमसे
ईश्वर से मांगी मेरी हर दुवाओं में हो तुम ,

फैली है हीना हाथों में
नाम तुम्हारा ले करके
सजी है कुमकुम माथे पे
एहसास तुम्हारा ले करके ,

जीती हूँ बन धड़कन तेरी
फिर क्यूँ नहीं तुम मेरे हो
एहसासों में हो हर पल तुम
फिर क्यूँ नहीं तुम मेरे हो ??”

2 Comments

  1. Girija Girija 30/10/2015
  2. omendra.shukla omendra.shukla 30/10/2015

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