“ज़िक्र” डॉ. मोबीन ख़ान

कितने दिनों से तू नज़र नहीं आया मोबीन।
फ़िर भी ये ज़माना तेरी ख़ैरियत नहीं पूछता हमसे।।

हर शक्स यहाँ बस अपने ही मतलब की बात करता है।
तेरे बारे में अब कोई ज़िक्र नहीं करता हमसे।।

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