मेरा स्वप्न अधूरा

मेरे आंसू फूल बन कर झडे
हंसी के साथ उनके
मुक्ताहारों से सजाया उनको,
अश्रु मोतियों को बुन के
उजाड़ कर आशा की वाटिका,
किया तेरी हर अभिलाषा को पूरा
सुखी रहे तू हरदम,
तभी पूर्ण होगा मेरा स्वप्न अधूरा

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir 30/10/2015
  3. Girija Girija 30/10/2015

Leave a Reply