चिड़िया रानी…..(बाल कविता)

चूं चूं करती चिड़िया रानी
नित नया संगीत सुनाती है !
डाली-डाली, दौड़े वृक्ष-वृक्ष
प्रातकाल हमको जगाती है !!

उठो जागो हुआ सवेरा
अपनी धुन में गाती है !
आँखे खोलो, नही सोना
अब रैना बीती जाती है !!

उदय हुआ नव् दिन का
मधुर पवन गुनगुनाती है !
रवि बिखेरे अपनी किरणे
नभ में लाली बिखराती है !!

लहलाते वृक्ष हरे भरे,
पुष्पों से सुगंध आती है !
करलव करते नभ में पंछी
मिलकर सरगम गाती है !!

रोज सवेरे मेरे घर भी
एक नन्ही चिड़िया आती हैं !
छेड़कर वो मधुर संगीत
निश दिन हमे बताती है !!

उठ जाओ तुम मेरे प्यारो
तुम्हारी डगर बुलाती है !
राह देखती मंजिल तुम्हारी
ये रोज स्मरण कराती है !!

@@@___डी. के. निवातियाँ____@@@

10 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 29/10/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/10/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/10/2015
  3. Rinki Raut Rinki Raut 29/10/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/10/2015
  4. pankaj charpe pankaj charpe 29/10/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/10/2015
  5. Shyam Shyam 30/10/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/10/2015

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