एक कच्ची धूलभरी सड़क

एक कच्ची धूलभरी सड़क हूँ
ईंटों का सहारा नहीं जिसे
न ही कोलतार की वह सख्त परत

गुजर गए कितने ही वाहन
बन कर घटना चक्र जीवन से
छाती को चीरते हुए
उखाड़ते बिखराते हुए पाहन

भारी गए मुझे दाब
जो हलके थे वे भी मुझपर
छोड़ गए अपनी अमिट छाप।

घटनाओं के दायरे में
पिसता हुआ मेरा मन
बीत जाएगा यूँही
धुल उडाता यह जीवन।

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/10/2015
    • Uttam Uttam 27/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/10/2015
    • Uttam Uttam 27/10/2015
  3. Saleem Ahmad 28/10/2015
  4. Girija Girija 28/10/2015

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