“एहसास” डॉ. मोबीन ख़ान

यूँ तो अपनी मुलाक़ात के ज़माने गुज़र गए।
फिर भी तेरे साथ होने का एहसास होता है।।

आखिर कब तक हम यूँ ही ज़िंदा रहेंगे।
अब तो हर सुबह इन नज़रो को तेरा इंतज़ार होता है।।

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/10/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 19/11/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/10/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 19/11/2015

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