“सलाम “

दिल की कलम और आंसुओं की स्याही से
जो कभी ना कहा वो अंजाम लिख रहा हु |
दूर रहकर भी प्यार करता है ये दिल जिसे
उस महबूब को आज सलाम लिख रहा हु ||

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