नफरत का बीज

कल शहर में कुछ शरीफों ने नफरत का बीज बोया
इंसानियत और भाईचारे को लहूलुहान कर दिया ।
आपस मे गले मिलने वाले अब गला काट रहे हैं
अच्छे खासे बसेरे को श्मशान कर दिया ।
परिंदे भी चहचहाने से डरते हैं अब यहाँ
हरे भरे उपवन को बियाबान कर दिया ।
बस्तियाँ जो खुशियों के गीत गातीं थीँ कभी
जानवरों की तरह उनको भी बेजुबान कर दिया ।
सहमी हुई निगाहें अब दरीचों से झाँकती भी नहीं
भुजंगों को उनका जा निगहबान कर दिया ।
गम की चादर ओढे मानवता सिसकने लगी “राज“
इतना मुश्किल उसका जो इम्तिहान कर दिया ।

राज कुमार गुप्ता – “राज“

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/10/2015
  2. RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar gupta 25/10/2015

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