कैसा परिवर्तन -शिशिर “मधुकर”

जीवन में ना जाने ये कैसा परिवर्तन अब आया है
मिटते रिश्तों की छवियों ने मन को वीरान बनाया है
कभी ना सोचा था जो हमने कैसा आज नज़ारा है
सब अपने और परायों ने सीने में खंजर मारा है
पहले तो दर्द भी होता था उसका भी अब नाम नहीं
कितनी भी हम कोशिश कर लें पर मिलता आराम नहीं
किस्मत के इस खेल में हमने जब भी दाँव लगाए है
बुरी तरह हर बाज़ी हारे कुछ ऐसे पासे आए हैं
इस खेल में देखेंगे आगे अब क्या क्या किस्सा होता है
सच को कोई पहचान मिलेगी या झूठ महल में सोता है

शिशिर “मधुकर”

10 Comments

  1. RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 24/10/2015
  2. Shyam Shyam 25/10/2015
  3. omendra.shukla omendra.shukla 25/10/2015
  4. Shishir "Madhukar" Shishir 25/10/2015
  5. श्याम गुप्त shyamgupt 25/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir 25/10/2015
  6. Girija Girija 28/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/10/2015
  7. Manjusha Manjusha 26/11/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/11/2015

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